Apr 30 2009

बचपन की यादे , मछली जल की रानी है , पोशम्पा भाई पोशम्पा

Tag: Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya, Indian Cultureसुदीप साकल्ले @ 10:25 pm

बचपन की यादे — क्या आप इन्ही में से किसी कविता में अपना बचपन खोया हुआ देख पाते है ?

मछली जल की रानी है,
जीवन उसका पानी है।
हाथ लगाओ डर जायेगी
बाहर निकालो मर जायेगी।
************

पोशम्पा भाई पोशम्पा,
सौ रुपये की घडी चुराई।
अब तो जेल मे जाना पडेगा,
जेल की रोटी खानी पडेगी,
जेल का पानी पीना पडेगा।
थै थैयाप्पा थुशमदारी बाबा खुश।
************

आलू-कचालू बेटा कहाँ गये थे,
बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।
बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।
**************

आज सोमवार है,
चूहे को बुखार है।
चूहा गया डाक्टर के पास,
डाक्टर ने लगायी सुई,
चूहा बोला उईईईईई।
************

झूठ बोलना पाप है,
नदी किनारे सांप है।
काली माई आयेगी,
तुमको उठा ले जायेगी।
************

चन्दा मामा दूर के,
पूए पकाये भूर के।
आप खाएं थाली मे,
मुन्ने को दे प्याली में।
************

तितली उड़ी,
बस मे चढी।
सीट ना मिली,
तो रोने लगी।
ड्राईवर बोला, आजा मेरे पास,
तितली बोली ” हट बदमाश “।
************


Apr 23 2009

पिता

Tag: Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya, Indian Culture, भारत महान पुरुषप्रकाश खन्डेलवाल @ 5:45 pm

पिता जीवन है, सम्बन्ध है, शक्ते है, …….. पिता
पिता सत्य के निर्माण की अभिवियक्ति है,
पिता अँगुली पकडे बच्चे का सहारा है,
पिता कभी कुछ खट्टा कुछ खारा है,
पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है,
पिता धोष से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है,
पिता रोटी है, कपडा है, मकान है,
पिता छोटे से परिन्दे का बडा आसमान है
पिता छोटे से परिन्दे का बडा आसमान है
पिता अप्रदर्शित अनन्त त्याग है,
पिता है, तो बच्चो को इन्तजार है,
पिता से ही बच्चो के ढेर सारे सपने है,
पिता है तो बाजार के सब खिलोने अपने है,
पिता है तो बाजार के सब खिलोने अपने है
पिता से परिवार मे प्रतिपल राग है,
पिता से ही माँ की बिन्दी और सुहाग है,
पिता परमात्मा की जगत के प्रति अशक्ति है,
पिता ग्रुहस्थ आषम मे उच्च स्थिति की भक्ति है,
पिता अपनी इछ्छाओ का हनन और परिवार की पुर्ति है,
पिता रक्त से निकले हुए सन्स्कारो की मुर्ति है,
पिता एक जीवन को जीवन का दान है,
पिता दुनिया दिखाने का एहसान है,
पिता सुरक्षा है अगर सिर पर हाथ है ,
पिता नही तो बचपन अनाथ है
पिता नही तो बचपन अनाथ है
तो पिता से बडा तुम अपना नाम करो,
पिता का अपमान नही उन पर अभिमान करो,
क्योकी माँ बाप की कमी को कोई पाट नही सकता,
और ईश्वर भी इनके आषिषों को काट नही सकता,
विश्व में किसी भी देवता का स्थान दुजा है,
माँ बाप की पुजा ही सबसे बडी पुजा है,
विश्व मे किसी भी तिर्थ की यात्रा वियर्थ है,
यदि बेटे के रहते माँ बाप असमर्थ है
यदि बेटे के रहते माँ बाप असमर्थ है
वो खुशनसीब है, माँ बाप जिनके साथ होते है
क्योकी माँ बाप की आशिषों के हाथ हजारों हाथ होते हैं
क्योकी माँ बाप की आशिषों के हाथ हजारों हाथ होते हैं


Apr 22 2009

किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है….

Tag: Deep Thinkers and Fools, Indian Culture, जिज्ञासासुदीप साकल्ले @ 4:51 am

अगर ख़िलाफ़ हैं होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है

लगेगी आग तो आएँगे घर कई ज़द में
यहाँ पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है

मैं जानता हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकिन
हमारी तरहा हथेली पे जान थोड़ी है

हमारे मुँह से जो निकले वही सदाक़त है
हमारे मुँह में तुम्हारी ज़ुबान थोड़ी है

जो आज साहिबे मसनद हैं कल नहीं होंगे
किराएदार हैं ज़ाती मकान थोड़ी है

सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़ी है

रचनाकार: राहत इन्दौरी


Apr 21 2009

माता पिता

Tag: Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya, Indian Culture, Uncategorizedप्रकाश खन्डेलवाल @ 3:18 am

बहुत रोते हैं लकिन दामन हमारा नम नही होता
इन आँसुओं के बरसने का कोई मॉसम नही होता
मैं अपने दुश्मनों के बीच भी महफुज होता हुं
मेरी माँ की दुआओ का खजाना कम नही होता

माँ,

माँ सवेंदना है, भावना है एहसास है, ………… माँ
माँ सवेंदना है, भावना है एहसास है, ………… माँ
माँ जीवन के फुलो मेँ खुशबु का वास है, ………… माँ
माँ रोते हुए बच्चे का खुशनुमा पलना है, ………… माँ
माँ मरुथल में नदी या मीठा सा झरना है, ………… माँ
माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है, ………… माँ
माँ पुजा की थाली है, मन्त्रो का जाप है, ………… माँ
माँ आन्खों का सिसकता हुआ किनारा है, ………… माँ
माँ गालों पर पप्पी है, ममता की धारा है, ………… माँ
माँ झुलसते दिनोँ में, कोयल की बोली है, ………… माँ
माँ कुम्कुम है, महेन्दी है, सिन्दुर है, रोली है, ………… माँ
माँ कलम है, दवात है, स्याही है, ………… माँ
माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है, ………… माँ
माँ, त्याग है, तपस्या है, सेवा है, ………… माँ
माँ, फुक से ठंडा किया हुआ कलेवा है, ………… माँ
माँ, अनुष्ठान है, साधना है, हवन है, ………… माँ
माँ, जिन्दगी के मोहल्ले में, आत्मा का भवन है, ………… माँ
माँ, चुडी वाले हाथों के मजबुत कन्धों का नाम है, ………… माँ
माँ काशी है, काबा है और चारो धाम है, ………… माँ
माँ चिन्ता है, याद है, हिचकी है, ………… माँ
माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है, ………… माँ
माँ चुल्हा रोटी, धुआँ, और हाथों का छाला है, ………… माँ
माँ, जिन्दगी की कडवाहट में, अमरित का प्याला है, ………… माँ
माँ. प्रुथ्वी है, जगत है, धुरी है, ………… माँ
माँ बिना इस स्रुष्ठी की कल्पना अधुरी है
तो माँ की यह कथा अनादि है
यह अध्याय नही है
और माँ का जीवन में कोई पर्याय नही है
और माँ का जीवन में कोई पर्याय नही है
तो माँ का महत्व दुनिया मे कम हो नही सकता,
और माँ जैसा दुनिया मेँ कोई हो नही सकता

भाईयों और बहनों,
अगर तुम दुनिया के सबसे सम्पन्न लोगों में से हो,
जिनके पास यह दौलत है
तो फोन घुमाओ, और माँ को कहो, माँ, आय लव यु वेरी मच


Apr 20 2009

मैं एक आम इन्सान हूं…

Tag: Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahitya, Indian Culture, Uncategorized, जिज्ञासासुदीप साकल्ले @ 5:27 am

मैं एक आम इन्सान हूं…
मैं कम बोलता हूं, पर कुछ लोग कहते हैं कि
जब मैं बोलता हूं तो बहुत बोलता हूं.
मुझे लगता है कि मैं ज्यादा सोचता हूं मगर उनसे पूछ कर देखिये
जिन्हे मैंने बिन सोचे समझे जाने क्या क्या कहा है!

मैं एक आम इन्सान हूं…
मैं जैसा खुद को देखता हूं,
शायद मैं वैसा नहीं हूं…….
कभी कभी थोड़ा सा चालाक और कभी बहुत भोला भी…
कभी थोड़ा क्रूर और कभी थोड़ा भावुक भी….

मैं एक आम इन्सान हूं…
जिसके कुछ सपने हैं…
कुछ टूटे हैं और बहुत से पूरे भी हुए हैं…
थोड़ा सा विद्रोही…परम्परायें तोड़ना चाहता हूं …
और कभी कभी थोड़ा डरता भी हूं…

मैं एक आम इन्सान हूं…
मुझे खुद से बातें करना पसंद है और दीवारों से भी…
बहुत से और लोगों की तरह
मुझे भी लगता है कि मैं अकेला हूं…
मैं बहुत मजबूत हूं और बहुत कमजोर भी..

मैं एक आम इन्सान हूं…

यह पोस्ट( वेब महाजाल) इन्टरनेट के किसी पेज से कॉपी करा हुआ है, अगर आप इस कविता के रचियता को जानते है ये आप स्वयं है तो कृप्या sudeep@infovinity.com संपर्क करे और आपका नाम ईमेल एड्रेस और वेबसाइट को कन्हैया.कॉम पर अपडेट कर दिया जायेगा


Mar 04 2009

धूम्रपान एक कार्य महान -सिगरेट सुलगाओ

Tag: Deep Thinkers and Fools, जिज्ञासासुदीप साकल्ले @ 4:47 am

सिगरेट है संजीवनी
पीकर स्वास्थ्य बनाओ
समय से पहले बूढ़े होकर
रियायतों का लाभ उठाओ

सिगरेट पीकर ही
हैरी और माइकल निकलते हैं
दूध और फल खाकर तो
हरगोपाल बनते हैं
जो नहीं पीते उन्हें
इस सुख से अवगत कराओ
बस में रेल में घर में जेल में
सिगरेट सुलगाओ

अगर पैसे कम हैं
फिर भी काम चला लो
जरूरी नहीं है सिगरेट
कभी कभी बीड़ी सुलगा लो
बीड़ी सफलता की सीढ़ी
इस पर चढ़ते चले जाओ
मेहनत की कमाई
सही काम में लगाओ

जो हड्डियां गलाते हैं
वो तपस्वी कहलाते हैं
ऐ कलयुग के दधीचि
हड्डियों के साथ करो
फेफड़े और गुर्दे भी कुर्बान
क्योंकि…
धूम्रपान एक कार्य महान
तो करो सब इसका सम्मान…. …………..


Feb 02 2009

क्या लिखूँ

Tag: Deep Thinkers and Fools, Hindi Sahityaप्रकाश खन्डेलवाल @ 5:17 pm

कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ

या दिल का सारा प्यार लिखूँ

कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखू या सपनो की सौगात लिखूँ

मै खिलता सुरज आज लिखू या चेहरा चाँद गुलाब लिखूँ

वो डूबते सुरज को देखूँ या उगते फूल की सान्स लिखूँ

वो पल मे बीते साल लिखू या सादियो लम्बी रात लिखूँ

मै तुमको अपने पास लिखू या दूरी का ऐहसास लिखूँ

मै अन्धे के दिन मै झाँकू या आँन्खो की मै रात लिखूँ

मीरा की पायल को सुन लुँ या गौतम की मुस्कान लिखूँ

बचपन मे बच्चौ से खेलूँ या जीवन की ढलती शाम लिखूँ

सागर सा गहरा हो जाॐ या अम्बर का विस्तार लिखूँ

वो पहली -पाहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ

सावन कि बारिश मेँ भीगूँ या आन्खो की बरसात लिखूँ

गीता का अॅजुन हो जाॐ या लकां रावन राम लिखूँ

मै हिन्दू मुस्लिम हो जाॐ या बेबस ईन्सान लिखूँ

मै ऎक ही मजहब को जी लुँ या मजहब की आन्खे चार लिखूँ

कुछ जीत लिखू या हार लिखूँ या दिल का सारा प्यार लिखूँ


Jan 15 2009

बांग्लादेशी ताजमहल प्रतिकृति

Tag: Deep Thinkers and Fools, Indian Culture, Taj Mahal, जिज्ञासासुदीप साकल्ले @ 1:46 pm

मुगल बादशाह शाहजहाँ को क्या पता था कि उसकी पुरजोर कोशिश के बावजूद उसके द्वारा निर्मित आगरा स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल की एक दिन नकल हो ही जाएगी।

कहा जाता है कि बादशाह शाहजहाँ ने अमर प्रेम के स्मारक ताजमहल के निर्माण के बाद उसके कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे, ताकि दुनिया में कोई इसकी नकल नहीं बना सके।

ताजमहल बनने के 356 वर्षों के बाद अब इसकी प्रतिकृति बनाने का दुस्साहस बांग्लादेश के एक करोड़पति फिल्मकार ने किया है। ताजमहल की यह नकल भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का कारण भी बन सकती है।

फ्रांस ने एफिल टावर को नकल से बचाने के लिए उसके डिजाइन का पेटेंट करा लिया था लेकिन भारत को इसका जरा भी अंदेशा नहीं रहा होगा कि दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल की भी भविष्य में कोई नकल बना लेगा। शायद इसीलिए सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया।

बांग्लादेशी फिल्मकार एहसानुल्लाह मोनी को बॉलीवुड फिल्मों की नकल बनाने के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने भारत की ऐसी ऐतिहासिक विरासत की नकल की है, जिस पर हर भारतीय को बहुत गर्व है और जिसकी एक झलक के लिए विश्व के कोने-कोने से लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष भारत की यात्रा करते हैं।

मोनी ने ताजमहल की इस प्रतिकृति का निर्माण बांग्लादेश की राजधानी ढाका से लगभग 30 किलोमीटर दूर नारायणगंज जिले के सोनारगाँव में लगभग पाँच वर्ष पहले शुरू कराया था।

ताजमहल की यह नकल अब लगभग बनकर तैयार हो गई है और इसे संभवतः मार्च में आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

बकौल मोनी उन्हें ताजमहल की नकल बनाने का विचार वर्ष 1980 में उस समय आया, जब उन्होंने स्वयं आगरा जाकर ताजमहल देखा। हालाँकि बाद में उन्होंने कई बार आगरा जाकर बारीकी से ताजमहल को देखा और उसके डिजाइन की हूबहू नकल करने के लिए कई विशेषज्ञों को भी वहाँ भेजा।

शाहजहाँ ने ताजमहल बनाने के लिए उत्कृष्ट निर्माण सामग्री का उपयोग किया था। इसमें प्रयुक्त संगमरमर राजस्थान के मकराना से, लाल पत्थर सिकरी धौलपुर से, कीमती पत्थर भारत के दूरदराज क्षेत्रों श्रीलंका और अफगानिस्तान से मँगाए गए थे।

मोनी ने नकली ताजमहल के लिए संगमरमर और ग्रेनाइट इटली से और हीरे बल्जियम से मँगाए हैं। बंगलादेश में बनने वाले ताजमहल की नकल बनाने पर लगभग छह करोड़ डॉलर की लागत आएगी।

भारत ने अपनी इस बेशकीमती राष्ट्रीय धरोहर की नकल बांग्लादेश में बनाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। बांग्लादेश में प्रकाशित समाचारों के अनुसार ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के प्रवक्ता दीपक मित्तल का कहना है कि उन्हें भी मीडिया के जरिए ही ताजमहल की नकल बनाए जाने के बारे में जानकारी मिली है। वे इस बारे में विस्तृत ब्यौरा जुटा रहे हैं।

उनका कहना है कि कोई भी व्यक्ति भारत जाकर किसी भी ऐतिहासिक इमारत की नकल कैसे कर सकता है।

हालाँकि बांग्लादेशी अधिकारियों ने इस बात को खारिज कर दिया है कि भारतीय ताजमहल का किसी प्रकार का कॉपीराइट किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कहीं भी इस बात का उल्लेख नहीं है कि इस तरह की इमारत की नकल करना गैरकानूनी है।

जानकारों का मानना है कि बांग्लादेश का इतिहास भी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से भरा पड़ा है। इससे पहले बांग्लादेश में लुइस खान ने संसद भवन का ऐसा डिजाइन तैयार किया था, जिसे बनने में लगभग दो दशक का समय लगा था। भारतीय इमारतों की नकल बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य विश्व स्तर पर लोकप्रियता हासिल करना है ताकि पर्यटकों को यहाँ आकर्षित किया जा सके।

मोनी का कहना है कि बंगलादेश में अधिकतर लोग विश्व की सबसे खूबसूरत इमारत ताजमहल को देखना चाहते हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे भारत की यात्रा नहीं कर सकते, इसलिए उन्होंने ताजमहल की प्रतिकृति अपने देश में ही बनाने का निर्णय लिया।

बांग्लादेश में ताजमहल की नकल बनाने के पीछे मुख्य कारण गरीबी रेखा से से नीचे जीवन यापन कर रहे लोगों को वैकल्पिक ताजमहल के दीदार कराना है।

कुछ इतिहासकारों का मानना है कि शाहजहाँ ने ताजमहल को बनाने वाले कारीगरों के हाथ कटवा दिए थे ताकि वे भविष्य में ऐसी कोई इमारत नहीं बना सकें, हालाँकि इसका कोई लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं है। ताजमहल की प्रतिकृति बनाने के पीछे चाहे जो भी कारण हों लेकिन इसके कारण भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कड़वाहट घुल सकती है। किसी भी गलत कार्य को भलाई के लिए किया गया बताकर सही नहीं ठहराया जा सकता।

हालाँकि ताजमहल की प्रतिकृति के आम जनता के लिए खोले जाने के बाद ही इसका निर्णय हो सकेगा कि मोनी असली ताजमहल की वास्तविक खूबसूरती की सही अर्थों में नकल करने में कहां तक सफल हुए हैं।

नकली ताजमहल देखने वालों का कहना है कि इस पूरी परियोजना को बड़े ही घटिया तरीके से पूरा किया जा रहा है और इसमें ऐसा कोई भी कीमती पत्थर, टाइल्स और हीरे लगे दिखाई नहीं देते जैसा कि इसके बनाने वाले फिल्म निर्देशक मोनी ने दावा किया है।

कुछ लोगों का कहना है कि बांग्लादेश में नकली ताजमहल बनने के बाद यहाँ बड़ी संख्या में पर्यटक आकर्षित होंगे, जिससे देश के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने असली ताजमहल देखकर उसकी सराहना में कहा था कि

दुनिया में दो तरह के लोग है, एक तो वे जिन्होंने ताजमहल देखा है और दूसरे वे जिन्होंने ताजमहल नहीं देखा है।

जाहिर है कि नकली ताजमहल तो ऐसी सराहना बटोर नहीं पाएगा।

As published on Webdunia (http://hindi.webdunia.com/news/news/national/0901/15/1090115022_1.htm)


Dec 29 2008

India – एक नज़र

Tag: Deep Thinkers and Foolsसुदीप साकल्ले @ 9:55 am

If I were asked under what sky the human mind has most fully developed some of its choicest gifts, has most deeply pondered over the greatest problems of life, and has found solutions of some of them which well deserve the attention even of those who have studied Plato and Kant, I should point to India. And if I were to ask myself from what literature we who have been nurtured almost exclusively on the thoughts of Greeks and Romans, and of the Semitic race, the Jewish, may draw the corrective which is most wanted in order to make our inner life more perfect, more comprehensive, more universal, in fact more truly human a life…again I should point to India.”

“The Upanishads are the … sources of … the Vedanta philosophy, a system in which human speculation seems to me to have reached its very acme.”

“I spend my happiest hours in reading Vedantic books. They are to me like the light of the morning, like the pure air of the mountains – so simple, so true, if once understood.”

– Friedrich Max Müller(December 6, 1823 – October 28, 1900)

मैक्स म्युलर जर्मनी के थे और इनके बारे में स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि पश्चिमी दुनिया में अगर किसी ने वेदांत के मर्म को समझा है तो वो हैं मैक्स म्युलर. मैक्स म्युलर 6 दिसंबर 1823 को पैदा हुए थे और उनकी मौत हुई वर्ष 1900 में लेकिन 16 साल की उम्र से ही उनकी संस्कृत में गहरी रुचि पैदा हो गई थी और इसी की वजह से मैक्स म्युलर ने सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द ईस्ट के नाम से 50 खंड लिखे हैं जिनमें शामिल है ऋग्वेद का भाष्य और उपनिषदों के अनुवाद. मैक्स म्युलर के पिता विल्हेम म्युलर श्रंगार रस के कवि थे और उनकी माँ जर्मनी के एक प्रांत के मुख्यमंत्री की बेटी थीं. मैक्स म्युलर ने संस्कृत के अलावा फ़ारसी और अरबी भी पढ़ी. उन्होंने भारतीय धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटेन लाए गए दस्तावेज़ों, ब्रह्मसमाज के भारतीय सदस्यों और ऑक्सफ़ोर्ड जैसे जाने माने विश्वविद्यालयो में अन्य यूरोपीय विद्वानों के साथ मिलकर किया. कुछ हिंदू लेखकों ने मैक्स म्युलर की ईसाई धर्म को हिंदू धर्म से बेहतर बताने की कोशिश करने वाला कहकर आलोचना की है तो कई ईसाई धर्मगुरुओं ने उनके जीवनकाल में उन्हें ईसाइयों के ख़िलाफ़ बताया था. लेकिन भारत के बारे में मैक्सम्युलर ने लिखा है, “अगर कोई मुझसे पूछे कि प्रकृति प्रदत्त गुणों का किस मानव मस्तिष्क ने सबसे बेहतर उपयोग किया है, किसने जीवन की सबसे बड़ी समस्याओं का गहराई से अध्ययन किया है – और वो कौन है जिसके साहित्य और ज्ञान को प्लेटो और कांट के दर्शन को समझने वालों को भी पढ़ना चाहिए, तो मैं उसे भारत का रास्ता बताऊँगा.”


Dec 28 2008

मधुशाला

Tag: Hindi Sahitya, Indian Culture, जिज्ञासाप्रकाश खन्डेलवाल @ 1:19 pm

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला,
प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला,
पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा,
सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।।१।

प्यास तुझे तो, विश्व तपाकर पूर्ण निकालूँगा हाला,
एक पाँव से साकी बनकर नाचूँगा लेकर प्याला,
जीवन की मधुता तो तेरे ऊपर कब का वार चुका,
आज निछावर कर दूँगा मैं तुझ पर जग की मधुशाला।।२।

प्रियतम, तू मेरी हाला है, मैं तेरा प्यासा प्याला,
अपने को मुझमें भरकर तू बनता है पीनेवाला,
मैं तुझको छक छलका करता, मस्त मुझे पी तू होता,
एक दूसरे की हम दोनों आज परस्पर मधुशाला।।३।

भावुकता अंगूर लता से खींच कल्पना की हाला,
कवि साकी बनकर आया है भरकर कविता का प्याला,
कभी न कण-भर खाली होगा लाख पिएँ, दो लाख पिएँ!
पाठकगण हैं पीनेवाले, पुस्तक मेरी मधुशाला।।४।

मधुर भावनाओं की सुमधुर नित्य बनाता हूँ हाला,
भरता हूँ इस मधु से अपने अंतर का प्यासा प्याला,
उठा कल्पना के हाथों से स्वयं उसे पी जाता हूँ,
अपने ही में हूँ मैं साकी, पीनेवाला, मधुशाला।।५।

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवला,
‘किस पथ से जाऊँ?’ असमंजस में है वह भोलाभाला,
अलग-अलग पथ बतलाते सब पर मैं यह बतलाता हूँ -
‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला।’। ६।


Dec 15 2008

हिन्दु कालगणना सुक्ष्मतम से विराट

Tag: Vedic Scienceप्रकाश खन्डेलवाल @ 1:25 pm

हिन्दु कालगणना सुक्ष्मतम से विराट महामुनि शुक वणित
२ परमाणु  ==> १ अणु
३ अणु ==> १ त्रसरैणु
३ त्रसरेण ==> १ त्रुटि
१०० त्रुटि ==> १ वेध
३ वेध ==> १ लव
३ लव ==> १ निमेष
३ निमेष ==> १ क्षण
५ क्षण ==> १ काष्ठा
३० काष्ठा ==> १ कला
१५ काष्ठा ==> १ लघु
१५ लघु ==> १ नाणिका
२ नाणिका ==> १ मुहूर्त
३० कला ==> १ मुहूर्त
३० मुहूर्त ==> १ दिनरात ( अहोरात )
७ दिनरात ==> १ सप्ताह
२ सप्ताह ==> १ पक्ष
२ पक्ष  ==> १ मास
२ मास ==> १ ऋतु
३ ऋतु ==> १ अयन ( ६ माह )
२ अयन ==> १ वर्ष
कलियुग की अवधि ==> ४,३२,००० वर्ष
द्वापरयुग की अवधि ( कलियुग से दुगनी ) ==> ८,६४,००० वर्ष
त्रेतायुग की अवधि ( कलियुग से तीन गुनी ) ==> १२,९६,००० वर्ष
सतयुग की अव्धि ( कलियुग से चार गुनी ) ==> १७,२८,००० वर्ष
१ चतुयुगी ( चारो युगो का योग ) ==> ४३,२०,००० वर्ष
१ मन्वन्तर ==> ७१ चतुयगी
अर्थात ( १ मन्वन्तहर = ७१  x  ४३,२०,००० वर्ष ) ==> ३,०६,७२,००० वर्ष

दो मन्व्न्तर के बीच एक सध्याश होता है जो एक सतयुग के बराबर होता है
सन्ध्या  ==> १७,२८,००० वर्ष

१ कल्प = १४ मन्वयन्तर व सन्ध्याश के १५ सतयुग के बराबर का योग
अर्थात( १४ x  ३,०६,७२,००० वर्ष ) + ( १५ x १७,२८,००० वर्ष )
 
१ कल्प ==> ४,३२,००,००,००० वर्ष

( ४ अरब ३२ करोड वर्ष )
                                                               
यह ब्रह्मा का १ दिन ओर उतनी ही अवधि की रात होती है
१ दिन रात ( ४ अरब ३२ करोड वर्ष  २ ) ==> ८,६४,००,००,००० वर्ष
ब्रह्मा का १  वर्ष  ==> ३१,१०,४०,००,००,००० ( ८,६४,००,००,००० वर्ष x ३६० ) ( ३१ खरब १० अरब ४० करोड वर्ष )
ब्रह्मा का १०० वर्ष ==> विष्णु का एक निमेष ==> ( ३१ खरब १० अरब ४० करोड वष x १०० )  ==> ३१ नील १० अरब ४० अरब वर्ष
विष्णु के १०० वर्ष  ==> रुद्र का १ दिन

रुद्र स्वय कालरुप है ओर अन्नत है,
इसलिये कहा जाता है – काल अन्नतान्नत है


Dec 08 2008

Enough is enough – Editor Mumbai (Times of India) to PM

Tag: Deep Thinkers and Fools, Indian Culture, जिज्ञासासुदीप साकल्ले @ 8:02 pm

Today I heard your speech. In which you said ‘NO BODY WOULD BE SPARED’. I would like to remind you that fourteen years has passed since serial bomb blast in Mumbai took place. Dawood was the main conspirator. Till today he is not caught. All our bolywood actors, our builders, our Gutka king meets him but your Government can not catch him. Reason is simple; all your ministers are hand in glove with him. If any attempt is made to catch him everybody will be exposed. Your statement ‘NOBODY WOULD BE SPARED’ is nothing but a cruel joke on this
unfortunate people of India.

Enough is enough. As such after seeing terrorist attack carried out by about a dozen young boys I realize that if same thing continues days are not away when terrorist will attack by air, destroy our nuclear reactor and there will be one more Hiroshima.

We the people are left with only one mantra. Womb to Bomb to Tomb. You promised Mumbaikar Shanghai what you have given us is Jalianwala Baug.

Today only your home minister resigned. What took you so long to kick out this joker? Only reason was that he was loyal to Gandhi family. Loyalty to Gandhi family is more important than blood of innocent people, isn’t it?

I am born and bought up in Mumbai for last fifty eight years. Believe me corruption in Maharashtra is worse than that in Bihar. Look at all the politician, Sharad Pawar, Chagan Bhujbal, Narayan Rane, Bal Thackray , Gopinath Munde, Raj Thackray, Vilasrao Deshmukh all are rolling in money. Vilasrao Deshmukh is one of the worst Chief minister I have seen. His only business is to increase the FSI every other day, make money and send it to Delhi so Congress can fight next election. Now the clown has found new way and will increase FSI for fisherman so they can build concrete house right on sea shore. Next time terrorist
can comfortably live in those house , enjoy the beauty of sea and then attack the Mumbai at their will.

Recently I had to purchase house in Mumbai. I met about two dozen builders. Everybody wanted about 30% in black. A common person like me knows this and with all your intelligent agency & CBI you and your finance minister are not aware of it. Where all the black money goes?

To the underworld isn’t it? Our politicians take help of these goondas to vacate people by force. I myself was victim of it. If you have time please come to me, I will tell you everything.

If this has been land of fools, idiots then I would not have ever cared to write you this letter. Just see the tragedy, on one side we are reaching moon, people are so intelligent and on other side you politician has converted nectar into deadly poison. I am everything
Hindu, Muslim, Christian, Schedule caste, OBC, Muslim OBC, Christian Schedule caste, Creamy Schedule caste only what I am not is INDIAN.

You politician have raped every part of mother India by your policy of divide and rule.

Take example of former president Abdul Kalam. Such a intelligent person, such a fine human being. You politician didn’t even spare him. Your party along with opposition joined the hands, because politician feels they are supreme and there is no place for good person.

Dear Mr Prime minister you are one of the most intelligent person, most learned person. Just wake up. First and foremost expose all selfish politician. Ask Swiss bank to give name of all Indian account holder. Give reins of CBI to independent agency. Let them find wolf
among us. There will be political upheaval but that will better than dance of death which we are witnessing every day. Just give us ambient where we can work honestly and without fear. Let there be rule of law.

Everything else will be taken care of.

Choice is yours Mr. Prime Minister. Do you want to be lead by one person or you want to lead the nation of 100 Crore people?


Dec 06 2008

रामसेतु तथा राम के युग की प्रामाणिकता – Ramsetu, RaamSetu

रामसेतु तथा राम के युग की प्रामाणिकता

हम भारतीय विश्व की प्राचीनतम सभ्यता के वारिस है तथा हमें अपने गौरवशाली इतिहास तथा उत्कृष्ट प्राचीन संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। किंतु दीर्घकाल की परतंत्रता ने हमारे गौरव को इतना गहरा आघात पहुंचाया कि हम अपनी प्राचीन सभ्यता तथा संस्कृति के बारे में खोज करने की तथा उसको समझने की इच्छा ही छोड़ बैठे। परंतु स्वतंत्र भारत में पले तथा पढ़े-लिखे युवक-युवतियां सत्य की खोज करने में समर्थ है तथा छानबीन के आधार पर निर्धारित तथ्यों तथा जीवन मूल्यों को विश्व के आगे गर्वपूर्वक रखने का साहस भी रखते है। श्रीराम द्वारा स्थापित आदर्श हमारी प्राचीन परंपराओं तथा जीवन मूल्यों के अभिन्न अंग है। वास्तव में श्रीराम भारतीयों के रोम-रोम में बसे है। रामसेतु पर उठ रहे तरह-तरह के सवालों से श्रद्धालु जनों की जहां भावना आहत हो रही है,वहीं लोगों में इन प्रश्नों के समाधान की जिज्ञासा भी है। हम इन प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयत्‍‌न करे:- श्रीराम की कहानी प्रथम बार महर्षि वाल्मीकि ने लिखी थी। वाल्मीकि रामायण श्रीराम के अयोध्या में सिंहासनारूढ़ होने के बाद लिखी गई। महर्षि वाल्मीकि एक महान खगोलविद् थे। उन्होंने राम के जीवन में घटित घटनाओं से संबंधित तत्कालीन ग्रह, नक्षत्र और राशियों की स्थिति का वर्णन किया है। इन खगोलीय स्थितियों की वास्तविक तिथियां ‘प्लैनेटेरियम साफ्टवेयर’ के माध्यम से जानी जा सकती है। भारतीय राजस्व सेवा में कार्यरत पुष्कर भटनागर ने अमेरिका से ‘प्लैनेटेरियम गोल्ड’ नामक साफ्टवेयर प्राप्त किया, जिससे सूर्य/ चंद्रमा के ग्रहण की तिथियां तथा अन्य ग्रहों की स्थिति तथा पृथ्वी से उनकी दूरी वैज्ञानिक तथा खगोलीय पद्धति से जानी जा सकती है। इसके द्वारा उन्होंने महर्षि वाल्मीकि द्वारा वर्णित खगोलीय स्थितियों के आधार पर आधुनिक अंग्रेजी कैलेण्डर की तारीखें निकाली है। इस प्रकार उन्होंने श्रीराम के जन्म से लेकर 14 वर्ष के वनवास के बाद वापस अयोध्या पहुंचने तक की घटनाओं की तिथियों का पता लगाया है। इन सबका अत्यंत रोचक एवं विश्वसनीय वर्णन उन्होंने अपनी पुस्तक ‘डेटिंग द एरा ऑफ लार्ड राम’ में किया है। इसमें से कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण यहां भी प्रस्तुत किए जा रहे है।

श्रीराम की जन्म तिथि
महर्षि वाल्मीकि ने बालकाण्ड के सर्ग 18 के श्लोक 8 और 9 में वर्णन किया है कि श्रीराम का जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ। उस समय सूर्य,मंगल,गुरु,शनि व शुक्र ये पांच ग्रह उच्च स्थान में विद्यमान थे तथा लग्न में चंद्रमा के साथ बृहस्पति विराजमान थे। ग्रहों,नक्षत्रों तथा राशियों की स्थिति इस प्रकार थी-सूर्य मेष में,मंगल मकर में,बृहस्पति कर्क में, शनि तुला में और शुक्र मीन में थे। चैत्र माह में शुक्ल पक्ष नवमी की दोपहर 12 बजे का समय था।

जब उपर्युक्त खगोलीय स्थिति को कंप्यूटर में डाला गया तो ‘प्लैनेटेरियम गोल्ड साफ्टवेयर’ के माध्यम से यह निर्धारित किया गया कि 10 जनवरी, 5114 ई.पू. दोपहर के समय अयोध्या के लेटीच्यूड तथा लांगीच्यूड से ग्रहों, नक्षत्रों तथा राशियों की स्थिति बिल्कुल वही थी, जो महर्षि वाल्मीकि ने वर्णित की है। इस प्रकार श्रीराम का जन्म 10 जनवरी सन् 5114 ई. पू.(7117 वर्ष पूर्व)को हुआ जो भारतीय कैलेण्डर के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है और समय 12 बजे से 1 बजे के बीच का है।

श्रीराम के वनवास की तिथि
वाल्मीकि रामायण के अयोध्या काण्ड (2/4/18) के अनुसार महाराजा दशरथ श्रीराम का राज्याभिषेक करना चाहते थे क्योंकि उस समय उनका(दशरथ जी) जन्म नक्षत्र सूर्य, मंगल और राहु से घिरा हुआ था। ऐसी खगोलीय स्थिति में या तो राजा मारा जाता है या वह किसी षड्यंत्र का शिकार हो जाता है। राजा दशरथ मीन राशि के थे और उनका नक्षत्र रेवती था ये सभी तथ्य कंप्यूटर में डाले तो पाया कि 5 जनवरी वर्ष 5089 ई.पू.के दिन सूर्य,मंगल और राहु तीनों मीन राशि के रेवती नक्षत्र पर स्थित थे। यह सर्वविदित है कि राज्य तिलक वाले दिन ही राम को वनवास जाना पड़ा था। इस प्रकार यह वही दिन था जब श्रीराम को अयोध्या छोड़ कर 14 वर्ष के लिए वन में जाना पड़ा। उस समय श्रीराम की आयु 25 वर्ष (5114- 5089) की निकलती है तथा वाल्मीकि रामायण में अनेक श्लोक यह इंगित करते है कि जब श्रीराम ने 14 वर्ष के लिए अयोध्या से वनवास को प्रस्थान किया तब वे 25 वर्ष के थे।

खर-दूषण के साथ युद्ध के समय सूर्यग्रहण
वाल्मीकि रामायण के अनुसार वनवास के 13 वें साल के मध्य में श्रीराम का खर-दूषण से युद्ध हुआ तथा उस समय सूर्यग्रहण लगा था और मंगल ग्रहों के मध्य में था। जब इस तारीख के बारे में कंप्यूटर साफ्टवेयर के माध्यम से जांच की गई तो पता चला कि यह तिथि 5 अक्टूबर 5077 ई.पू. ; अमावस्या थी। इस दिन सूर्य ग्रहण हुआ जो पंचवटी (20 डिग्री सेल्शियस एन 73 डिग्री सेल्शियस इ) से देखा जा सकता था। उस दिन ग्रहों की स्थिति बिल्कुल वैसी ही थी, जैसी वाल्मीकि जी ने वर्णित की- मंगल ग्रह बीच में था-एक दिशा में शुक्र और बुध तथा दूसरी दिशा में सूर्य तथा शनि थे।

अन्य महत्वपूर्ण तिथियां
किसी एक समय पर बारह में से छह राशियों को ही आकाश में देखा जा सकता है। वाल्मीकि रामायण में हनुमान के लंका से वापस समुद्र पार आने के समय आठ राशियों, ग्रहों तथा नक्षत्रों के दृश्य को अत्यंत रोचक ढंग से वर्णित किया गया है। ये खगोलीय स्थिति श्री भटनागर द्वारा प्लैनेटेरियम के माध्यम से प्रिन्ट किए हुए 14 सितंबर 5076 ई.पू. की सुबह 6:30 बजे से सुबह 11 बजे तक के आकाश से बिल्कुल मिलती है। इसी प्रकार अन्य अध्यायों में वाल्मीकि द्वारा वर्णित ग्रहों की स्थिति के अनुसार कई बार दूसरी घटनाओं की तिथियां भी साफ्टवेयर के माध्यम से निकाली गई जैसे श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास की यात्रा 2 जनवरी 5076 ई.पू.को पूर्ण की और ये दिन चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी ही था। इस प्रकार जब श्रीराम अयोध्या लौटे तो वे 39 वर्ष के थे (5114-5075)।

वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीराम की सेना ने रामेश्वरम से श्रीलंका तक समुद्र के ऊपर पुल बनाया। इसी पुल को पार कर श्रीराम ने रावण पर विजय पाई। हाल ही में नासा ने इंटरनेट पर एक सेतु के वो अवशेष दिखाए है, जो पॉक स्ट्रेट में समुद्र के भीतर रामेश्वरम(धनुषकोटि) से लंका में तलाई मन्नार तक 30 किलोमीटर लंबे रास्ते में पड़े है। वास्तव में वाल्मीकि रामायण में लिखा है कि विश्वकर्मा की तरह नल एक महान शिल्पकार थे जिनके मार्गदर्शन में पुल का निर्माण करवाया गया। यह निर्माण वानर सेना द्वारा यंत्रों के उपयोग से समुद्र तट पर लाई गई शिलाओं, चट्टानों, पेड़ों तथा लकड़ियों के उपयोग से किया गया। महान शिल्पकार नल के निर्देशानुसार महाबलि वानर बड़ी-बड़ी शिलाओं तथा चट्टानों को उखाड़कर यंत्रों द्वारा समुद्र तट पर ले आते थे। साथ ही वो बहुत से बड़े-बड़े वृक्षों को, जिनमें ताड़, नारियल,बकुल,आम,अशोक आदि शामिल थे, समुद्र तट पर पहुंचाते थे। नल ने कई वानरों को बहुत लम्बी रस्सियां दे दोनों तरफ खड़ा कर दिया था। इन रस्सियों के बीचोबीच पत्थर,चट्टानें, वृक्ष तथा लताएं डालकर वानर सेतु बांध रहे थे। इसे बांधने में 5 दिन का समय लगा। यह पुल श्रीराम द्वारा तीन दिन की खोजबीन के बाद चुने हुए समुद्र के उस भाग पर बनवाया गया जहां पानी बहुत कम गहरा था तथा जलमग्न भूमार्ग पहले से ही उपलब्ध था। इसलिए यह विवाद व्यर्थ है कि रामसेतु मानव निर्मित है या नहीं, क्योंकि यह पुल जलमग्न, द्वीपों, पर्वतों तथा बरेतीयों वाले प्राकृतिक मार्गो को जोड़कर उनके ऊपर ही बनवाया गया था।

सरोज बाला


Dec 06 2008

ईसा मसीह के सलीब पर आई ऐन आर आई लिखा रहता है, उसका क्या मतलब है?

Tag: जिज्ञासाप्रकाश खन्डेलवाल @ 10:39 am

ईसा मसीह के सलीब पर आई ऐन आर आई लिखा रहता है, उसका क्या मतलब है?

ये लैटिन भाषा के वाक्यांश Iesus Nazarenus Rex Iudaeorum का संक्षिप्त रूप है. इसका मतलब है नैज़ेरथ के ईसा यहूदियों के राजा. जिस तरह अपराधियों को पहचान के लिए कोई संख्या दी जाती है उसी तरह ये ईसा की पहचान थी जब उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था.


Dec 05 2008

भारत एक खोज- Bharat Ek Khoj

Tag: Vedic Scienceप्रकाश खन्डेलवाल @ 10:10 am

This video was embedded using the YouTuber plugin by Roy Tanck. Adobe Flash Player is required to view the video.

सृष्टि से पहले सत नहीं था, असत भी नहीं
अंतरिक्ष भी नहीं, आकाश भी नहीं था
छिपा था क्या कहाँ, किसने देखा था
उस पल तो अगम, अटल जल भी कहाँ था

सृष्टि का कौन है कर्ता कर्ता है यह वा अकर्ता
ऊंचे आसमान में रहता सता अध्यक्ष बना रहता
वही सचमुच में जानता, या नहीं भी जानता
हैं किसी को नहीं पता नहीं है पता

वो था ह्रन्यगर्भ सृष्टि से पहले विद्यमान
वही तो सारे भूतजगत का स्वामी महान
जो है अस्तित्व में धरती आसमान धारण कर
ऐसे किस देवता की उपासना करें हम अवि देकर

जिस के बल पर तेजोमय है अम्बर
पृथ्वी हरी भरी स्थापित स्थिर
स्वर्ग और सूरज भी स्थिर
किस देवता की उपासना करें हम अवि देकर

गर्भ में अपने अग्नि धारण कर पैदा कर
व्यापा था जल इधर उधर नीचे ऊपर
जगा चुके वो ऐकमेव प्राण बनकर
किस देवता की उपासना करें हम अवि देकर

ओम! सृष्टि निर्माता स्वर्ग रचियता पुर्वज रक्षा कर
स्तय धर्म पालक अतुल जल नियामक रक्षा कर
फैली हैं दिशाए बाहू जैसी उसकी सब में सब पर
ऐसे ही देवता की उपासना करें हम अवि देकर
ऐसे ही देवता की उपासना करें हम अवि देकर

ऋग्वेद (१०:१२९)  से सृष्टि सृजन की यह श्रुत 


Next Page »